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हल की हल्की बात

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

July 16, 2017

फुर्सत के पल में बैठे तो,
याद आ गई बीते पल की।
कितने सुखद अनुभूति हो चली,
बीत गया जो कल की।
यह जीवन अनमोल पलो को,
भूल गया था बल्कि।
बीते परिवर्तन के दिन ,
याद जो आयी आखे छलकी।
किया वही जो सही लगा था
न चिंता की फल की।
झेल रहा था प्रबल समस्या
चाह रही मन मे किसी हल की।

विन्ध्यप्रकाश मिश्र

Author
Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831 कवि, अध्यापक
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