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हर सीख बेटियों को——–

dr. pratibha prakash

dr. pratibha prakash

कविता

August 21, 2016

नहीं सीख बुरी कोई पर सब बेटियों के लिए क्यों है
नहीं रीत बुरी कोई फिर बेटियों के लिए क्यों है
विवेकपूर्ण परिधान हो है सही ये बात
पर नियंत्रित भी तो रहें दोषपूर्ण निगाह और जज्बात
है मासूमियत भली पर बेटियों के लिये बुरीक्यों है
नहीं सीख——-
क्या मुगल फिर से शासन हो गया फिर से परदा घूंघट चलन हो गया
नहीं अगर तो बेटियो के लिए मानसिकता वही क्यों है
नही सीख———-
क्या साडी में साक्षी का लड़ना सम्भव था
क्या दीपा का प्रदर्शन सलवार कमीज में सम्भव था
इतनी पहरेदारी कर्मो पे न होकर बेटियों पर क्यों है
नहीं सीख——–
गोपी से जाकर पूछो कैसे संधू ने खेला है
लपेट तिरंगे को जिस्म से कैसे चूमा है
समय की मांग पर भी नहीं आज़ादी बेटियों को क्यों है
नहीं सीख ——-
नहीं दौर अभी का ये याद दिलती हूँ
प.टी.उषा,अश्वनी,मल्लेश्वरी,मैरीकॉम गिनाती हूँ
नेहवाल और मिर्ज़ा को भी महत्ता न्यून सी ही क्यों है
नहीं सीख——-
कल्पना,सुनीता भी यदि परिधानों में बन्ध जाती
कतय साख तुम्हारी इतनी विश्व में बड़ पाती
इतनी सी समझ समय पर आती क्यों नहीं है
नहीं सीख——-
दृष्टि दोष करो ठीक समाज ये पुरुष प्रधान
सम्मान करो नारीत्व का इसमें छिपा तेरा अस्तित्व महान
सोचो प्रकृति की तुलना स्त्री की विद्वानों ने की क्यों है
नहीं सीख बुरी———

Author
dr. pratibha prakash
Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु... Read more
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