हर संकट में मार्गदर्शक प्रभु श्रीराम का चरित्र

हर संकट में मार्गदर्शक श्रीराम का चरित्र

#पण्डितपीकेतिवारी (लेख़क एवं पत्रकार)

आज की राम नवमी इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह गुरुवार के दिन पड़ी है। गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है और भगवान श्री राम विष्णु के अवतार हैं।
आज जब कोरोना की महामारी ने आमजन को घरों में कैद कर दिया है, संयम और सकारात्मकता की सबसे ज्यादा दरकार है। साथ ही जन-प्रतिनिधियों को भी लोक-कल्याण और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की सोच के साथ लोगों का जीवन सहेजने के प्रयास करने की जरूरत है। राजनीतिक स्वार्थ साधने की सोच छोड़कर जनता का साथ देने की दरकार है। वैश्विक चिंता के इस दौर में लॉकडाउन में जनता घर में रहकर लक्ष्मण रेखा का पालन करते हुए देश को इस संकट से बाहर निकाल सकती है तो नेतागण संवेदनाओं से बूते उन लोगों की समस्याएं समझ सकते हैं, जो इस संकट में बेघर और बेरोजगार हो गए है।
इस पीड़ादायी दौर में भगवान राम की न्यायप्रियता और लोककल्याणकारी नीतियाँ मार्गदर्शक बन सकती हैं। देश में आमजन के लिए स्वास्थ्य, समानता, सम्मान और न्याय के मोर्चे पर जो कुछ रीत रहा है, उसके प्रति सजग और संवेदनशील बना सकती हैं। यही वजह है कि जनकल्याण की सोच और लोकतांत्रिक व्यवस्था के आदर्श भगवान राम का जीवन आज भी स्मरणीय और अनुकरणीय है। भगवान राम के जीवन में समस्याओं का एक अविराम घटनाक्रम हुआ लेकिन हर परिस्थति में उनका संयम बना रहा। वे हर हाल में आमजन की भलाई की सोचते रहे। राम का जीवन ऐसे आदर्शो और संघर्षों का एक श्रेष्ठ उदाहरण है जिन्हें आमजन हो या जन-प्रतिनिधि, अपने जीवन में उतारें तो एक सभ्य और संवेदनशील समाज बनाया जा सकता है।बबिना किसी भेदभाव के जनकल्याणकरी नीतियों के जरिये समानता और मानवीयता पोषित कर समाज में हर पहलू में बदलाव लाया जा सकता है।
दरअसल, प्रभुत्व ज़माने की सोच से साथ की जाने वाली आज की स्वार्थी राजनीति से लेकर विखंडित हो रहे समाज तक, हर ओर मर्यादा को रेखांकित किया जाना आवश्यक है । प्रभु राम के जीवन आदर्शों को समझा जाना जरूरी है | संयम और धैर्य को अपनाने की दरकार है | मानवीय और नैतिक गुणों को जीवन में जगह देने की आवश्यकता है | देखने में आ रहा है कि मर्यादा का मान जीवन के किसी क्षेत्र में नहीं बचा है । तभी तो अर्थ का अनर्थ अब हर ओर देखा जा सकता है। यही वजह है कि कोरोना जैसी व्याधि से लड़ने का मामला हो या देश को भ्रष्टाचार, राजनीतिक स्वार्थ और अपराधों के बढ़ते आंकड़ों से निकालने की बात, जिस चेतनासंपन्न, सहनशील और धैर्यवान व्यवहार को हम भुला बैठे हैं, उसकी आज के अराजक समय में सबसे ज्यादा जरूरत है । यों भी वर्तमान समय में हमारे परिवेश में घटित हो रही हर अकुशल घटना के पीछे मानवीय संवेदनाओं का मर जाना ही अहम कारण है। आज आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी भयावह चिंताओं के बावजूद भी जो राजनीतिक आरोप -प्रत्यारोप, अशांति और अराजकता का माहौल बना हुआ है, उसमें जड़ों की ओर लौटना और मानवीय मूल्यों को सहेजना सबसे अधिक ज़रूरी प्रतीत हो रहा है । ऐसे में निःस्वार्थ भाव से जीना भूलते जा रहे इंसानों को मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्शों भरा जीवन बहुत कुछ सिखा सकता है | उनकी सीख संपूर्ण समाज के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है।
सात्विक सोच और सभी के कल्याण का भाव राजा राम के व्यक्तित्व में सहज ही सम्मिलित है ।अर्थहीन कोलाहल और संवेदनाहीन व्यवहार की ओर बढ़ रहे समाज में आज इसी सात्विक समझ की दरकार है | संयमित, मर्यादित और संस्कारित जीवन आज मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए बेहद ज़रूरी हैं । मौजूदा समय में प्रकृति के दोहन, राजनीतिक लोभ और सामाजिक पारिवारिक परिस्थितियों के बिखराव तक, सभी कुछ स्वार्थपरक और अमानवीय सोच को ही परिलक्षित करता है। नेता हों जनता, अहंकार भरा बर्ताव ही देखने को मिल रहा है | व्यवहार और विचार का यह विखंडन चिंतनीय ही नहीं भयभीत करने वाला भी है | ऐसे में मर्यादा पुरूषोत्तम राम के आदर्श यकीनन खुशहाल और सुरक्षित जीवन का आधार हो सकते हैं । उनके जीवन से जुड़ी हर रीति और नीति केवल जन कल्याण की रह पर ही जाती है | सामाजिक सांस्कृतिक सद्भावना, राष्ट्र कल्याण और जनसेवा राम के आदर्श व्यक्तित्व के आधार सतम्भ हैं । वे एक राजा के रूप में न केवल राजनैतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आदर्शस्वरूप माननीय हैं बल्कि एक आम इंसान के जीवन को भी नैतिक और स्वार्थरहित व्यवहार की ऊर्जा देने वाले हैं । विवेक , संयम और सदाचार की सीख उनके द्वारा लिए गए हर निर्णय में देखने को मिलती है।
विचारणीय है कि आज दुनिया के कई सुविधा संपन्न समाज और शक्तिशाली राष्ट्र कोरोना संक्रमण से जूझने में खुद असमर्थ पा रहे हैं। ऐसे में विश्व के हर कोने में सदाचारी जीवन, शाकाहारी खान-पान, सकारात्मक सोच, प्रकृति से जुड़ाव और नैतिक-मानवीय मूल्यों के मायने समझे जा रहे हैं। सुखद है कि भारतीय संस्कृति में सदाचार और सकारात्मक एवं नीति सम्मत सोच को सदा से ही महत्व दिया गया है। मानसिक, वैचारिक और व्यावहारिक श्रेष्ठता संवेदनशील समाज बनाने और किसी भी समस्या से जूझने के लिए जरूरी मानी गई है। समग्र रूप से देखें तो एक सच्चे जननायक के रूप में प्रभु राम का जीवन इन सभी बातों को लिए हैं। इतना ही नहीं करुणा, शांति, एकता, प्रगति और संवेदना- सब कुछ समाया है उनके अलौकिक चरित्र में । जो हमारे लौकिक व्यवहार और विचार को भी परिष्कृत कर सकता है। हमें नैतिक मूल्यों से जुड़े रहने की सीख देता है।
आज भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व इस संक्रमण के फैलाव से जुड़ी चिंताओं से जूझ रहा है। इस भय और भ्रम से भरे इस माहौल में राम का जीवन और मानवीय कल्याण से जुड़े भाव सबसे अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। संयमित और चेतनामयी व्यवहार इस व्याधि से लड़ने के अहम् हथियार हैं। आम लोगों में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का भाव अपना और औरों का जीवन सहेजने में मददगार बन सकता है। साथ ही देश के नीति-निर्माताओं को भी लोकहित का भाव सर्वोपरि रखना चाहिए। नीति कुशल राजा और संवेदनाओं से परिपूर्ण भगवान राम के व्यक्तित्व में समाज कल्याण की यही चेतना समाहित है । जो हमारे जीवन को ही नहीं मन को भी नई ऊंचाईयों पर पहुँचा सकती है। हमें प्रकृति से जोड़ सकती है। हर व्याधि से जूझने और जीतने का संयम और शक्ति दे सकती है।

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मैं एक लेखक एवं पत्रकार के रूप में रायपुर छत्तीसगढ़ एक अखबार में सहसंपादक के...
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