May 14, 2021 · कविता
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हर मर्ज की दवा- चुनाव

हर मर्ज की दवा है ये चुनाव
कोरोना को भी रोक देता है चुनाव
अब तो लगता है क्यों ना
हर महीने हो जाए ये मुआ चुनाव।।

चुनाव हो तो बढ़ने से
रुक जाती है महंगाई
सरकार भूल जाती है
तब पेट्रोल की कमाई।।

चुनाव तो मौका है सुनहरा
होने का सत्ता से जुड़ाव
इस वक्त तो तैयार हो जाते
नेता जी देने को कुछ भी भाव।।

कुछ भी करने को रहते तैयार
जब तक नहीं हो जाता चुनाव
किसी को जीत तो किसी को
दे जाता है वो हार रूपी घाव।।

जो वादे कभी पूरे ना हुए वो भी
पूरे हो जाते, गर हो सामने चुनाव
अब हमें तो लगता है इस देश की
हर समस्या का हल है चुनाव।।

जब भी देखो रोज़ बढ़ते है
बाजार आधारित पेट्रोल डीजल के दाम
जब कभी भी चुनाव होते है
उस पर भी कैसे लग जाती है लगाम।।

चुनाव से पहले खूब होते है
उद्घाटन और शिलान्यास
नई योजनाओं की भी होती है
भरमार और खूब बंदरबांट।।

जैसे ही खत्म हो चुनाव तो
फिर खड़ी हो जाती है समस्याएं
ना जाने चुनाव में क्या ताकत है
आते है तो दूर हो जाती है समस्याएं।।

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Surender sharma
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