कविता · Reading time: 1 minute

हर भाई की इक बहना हो।

हर बहना का इक भाई हो,
सुंदर सजी कलाई हो।
हर भाई को बहना मिले
परिवार सानंद सुखदाई हो।
आंगन बहनों से गुलजार रहे,
रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई हो ।।
जो बेटी नहीं चाहते उनको
यह संदेश सुनाई हो
बिन बेटी बहन कहाँ होगी।
बिटिया बिना आंगन दुखदाई हो।।
समझ रहे हैं हमसब आज
हर भाई की इक बहना हो।
हर बहनों का इक भाई हो
सुंदर सजी कलाई हो।
रक्षाबंधन सुखदाई हो।।
विन्ध्य प्रकाश मिश्र विप्र

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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै मौलिक विचारों के बिम्ब को लिपिबद्ध करता हूँ । स्वान्तःसुखाय लिखता हूँ । किसी प्रसिद्धि…
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