कविता · Reading time: 1 minute

हर बार तुम

तुम मधुमय निर्झर का जल
नित्य निनादित नित्य प्रवाहित
हर पल निर्मल हर पल कल-कल
शीतल हीतल जलधार तुम हो
अशांत मन की कगार तुम हो
हृदय तल में हर बार तुम हो

अशोक सोनी
भिलाई ।

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