हर जगह समान हूँ

मैं
विद्या , धन , शक्ति हूँ ,
विवेक से सोचो ,
मैं ” महिला ” हूँ ,
हर जगह समान हूँ
बस मेरे प्रति नजरिया बदलो
पुराने दकियानूसी सोच बदलो
हर कली को खिलने दो
प्रकृति के उपहार को ना मसलने दो
प्यार का समर्पण , सेवा , करुणा , दया आप में
सिर्फ एक दिन का नाता ना दो
हर पल , हर क्षण आप का होने दो
तभी सार्थक ” महिला दिवस ” हो
अनंत शुभकामनाये सभी महिला को हो
— राजू गजभिये —

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परिचय - मैं राजू गजभिये , लेखक एवं मार्गदर्शन (Counselor ) हिंदी साहित्य सम्मेलन सचिव...
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