हरे रामा , हरे कृष्णा

उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ रही है।
वुद्धि-सी कुछ आ रही है।
यूँ लगे जैसे कि- मुरली ,
कान में कुछ गा रही है ।
कर्म-पथ की राह कान्हा ,
मन को मेरे भा रही है ।
मौत भी प्रिय लगती अब तो,
ज़िन्द़गी भी छा रही है।
ओ ! मेरे हमदम व साथी ,
मेरे संग-संग गुनगनाओ ,
हरे रामा , हरे कृष्णा ।
मेरे संग-संग तुम भी गाओ,
हरे रामा, हरे कृष्णा।
हरे रामा , हरे कृष्णा ।

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 796

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share