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हरे रामा , हरे कृष्णा

उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ रही है।
वुद्धि-सी कुछ आ रही है।
यूँ लगे जैसे कि- मुरली ,
कान में कुछ गा रही है ।
कर्म-पथ की राह कान्हा ,
मन को मेरे भा रही है ।
मौत भी प्रिय लगती अब तो,
ज़िन्द़गी भी छा रही है।
ओ ! मेरे हमदम व साथी ,
मेरे संग-संग गुनगनाओ ,
हरे रामा , हरे कृष्णा ।
मेरे संग-संग तुम भी गाओ,
हरे रामा, हरे कृष्णा।
हरे रामा , हरे कृष्णा ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
ईश्वर दयाल गोस्वामी
सागर , मध्यप्रदेश
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02...