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हरे रामा , हरे कृष्णा

ईश्वर दयाल गोस्वामी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

कविता

November 12, 2016

उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ रही है।
वुद्धि-सी कुछ आ रही है।
यूँ लगे जैसे कि- मुरली ,
कान में कुछ गा रही है ।
कर्म-पथ की राह कान्हा ,
मन को मेरे भा रही है ।
मौत भी प्रिय लगती अब तो,
ज़िन्द़गी भी छा रही है।
ओ ! मेरे हमदम व साथी ,
मेरे संग-संग गुनगनाओ ,
हरे रामा , हरे कृष्णा ।
मेरे संग-संग तुम भी गाओ,
हरे रामा, हरे कृष्णा।
हरे रामा , हरे कृष्णा ।

Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार... Read more
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