कविता · Reading time: 1 minute

हरे रामा , हरे कृष्णा

उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ रही है।
वुद्धि-सी कुछ आ रही है।
यूँ लगे जैसे कि- मुरली ,
कान में कुछ गा रही है ।
कर्म-पथ की राह कान्हा ,
मन को मेरे भा रही है ।
मौत भी प्रिय लगती अब तो,
ज़िन्द़गी भी छा रही है।
ओ ! मेरे हमदम व साथी ,
मेरे संग-संग गुनगनाओ ,
हरे रामा , हरे कृष्णा ।
मेरे संग-संग तुम भी गाओ,
हरे रामा, हरे कृष्णा।
हरे रामा , हरे कृष्णा ।

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