"हरि सिमरण"

हरि सिमरण जो भी करे,बढ़ता निस दिन नूर
सीरत शरणी श्याम जो, रहता गम से दूर
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

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सपने देखना कैसे छोड़ दूं सजाये अरमान कैसे तोड़ दूं हिन्दी, हरियाणवी में ग़ज़ल, गीत,...
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