लघु कथा · Reading time: 1 minute

हरिया

हरिया आज ही कमाये बदे गांव से दिल्ली आवा है।स्टेशन से उतर कर वह सीधा अपने गांव के एक मित्र रामधनी के घर पहुचता है। खाना पीना करने के उपरांत वह दिल्ली घुमने अकेले निकल पड़ता है, कुछ दूर चलने के बाद उसे एक पुलिस चौकी दिखता है, जहाँ बड़े- बड़े एवं साफ अक्षरों में लिखा होता है”दिल्ली पुलिस आपकी सेवा में सदैव तत्पर” क्या हम आपकी सहायता कर सकतेहै?
पढते ही हरिया की बाछें खिल उठती हैं।चौकी पे जाता है और चौकी इंचार्ज से कहता है।……
ये भईया पीयर कमीज…… तु सेवा करे को कहत हौ अउर सहायता भी देत हौ तबो कवनो मिला आत ना है पर परेशान जीन होय।
हम आ गवा हैं हमें पहिले तो जल पीलाय देव अऊर ओकरे बाद दिल्ली घुमाय देव।…
इतना सुनना था कि चौकी इंचार्ज ने वो सेव कीहीस की का बतावें:-उनका पुरा तसरीफ सुजाय दिहीस।तो बोलो बनारसी भैया की
… पं.संजीव शुक्ल “सचिन”

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