7 रागनी किस्सा :- भोला भंडारी-मां पार्वती

जैसा कि सुनने में आया है मां पार्वती जी और बाबा भालेभंडारी की छोटी छोटी बातों पर नोंक झोंक हो जाती थी एक समय की बात है जब पार्वती बाबा भंडारी से कहती हैं। वैसे तो आपको तीन लोक का स्वामी कहां जाता है तरन्तु आप अपणा हाल चाल और रहण सहण देखे। और एक बात के द्वारा क्या क्या कहती है,,,

*एक बात मेरै खटक रही ,तुम करकै ध्यान बताणा ।*
*कहै त्रिलोकी का नाथ तन्यै तेरा कंगला किसा बाणा..!!टेक!!*

फूटे थे भाग मेरे जिस दिन तै तेरे संग होई,
जितनी दुखी मै जगत मै इतनी और ना कोई,
दुनियां लाया करै बांग बगीचे तन्यै भांग बोई,
जब तै आई ब्याली मै कदे ना सुख तै सोई,
रहणा हो सै महला का, के पहाड़ा का ठिकाणा..!!१!!

दुध दही होया करै घर मै आकै आड़ै देखे ना,
भरै रहैया करै चुन के पीपे ठाकै आड़ै देखे ना,
छपन डाल के बणै पकवान खाकै आड़ै देखे ना,
कित सै रसोई तेरी मन्यैं छोंक लाकै आड़ै देखे ना ,
दाल मसाले नही दिखते बता बिना स्वाद का के खाणा..!!२!!

शहर करण नै होया करै हाथी घोड़ा की सवारी,
बुगी टिमटिम अरथ मंझोली लाग्या करै प्यारी,
जाए तै महीने बीस दिन मै राजी रहै रिस्तेदारी,
आंनद खातिर जीणा हो सै या किसनै मत मारी,
नही दिखती यारी असनाई ना कितै आणा जाणा ..!!३!!

कहै मनजीत पहासौरिया मोकै पै बात धरी जा सै,
लाकै छंद रसीले फेर कली चार भरी जा सै,
गावण की खटक मै बहोत दुनियां फिरी जा सै,
झूठी दे शाबाशी और झूठी बढाई करी जा सै,
तेरे धौरै साज ना साजिंदे, खाली डमरू का गाणा..!!४!!

*रचनाकार:- पं० मनजीत पहासौरिया*
*फोन नं०:- 9467354911*

293 Views
म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन में कोषाध्यक्ष पद पर कार्यरत हूं। हरियाणवी संस्कृति बचाना और...
You may also like: