धाकड़ जाटणी ( हरियाणवी गीत )

ना लेवै जाटणी तै पंगा
तेरै खात्तर चंगा रै
ना तो पछतावैगा पाछै
तू बन ज्या बन्दा रै

मेरी धाक चोगरदे नै छोरे
तनै पड़ज्या महंगा रै
ना लेवै जाटणी तै पंगा
तेरै खात्तर चंगा रै

तेरी हवा काढ़ दयूं सारी
तू जोण सी हवा मै उड़ रहया
ना सीधी सादी जानै
मेरे नाम का रुक्का पड़ रहया

तेरै गले का फंदा
यो बन ज्या पंगा रै
छोरे सीधी तरिया मान ज्या
तू पिटदा लगैगा भुंडा रै

तेरै बैरगे छोरे रै
मैंनै मोर बना दिए कितने
जै मैं आजयां अपनी पै
तेरे मिट ज्यां जीण के सपने

ना लेवै जाटणी तै पंगा
तेरै खातर चंगा रै
मेरी धाक चोगरदे नै छोरे
तनै पड़ज्या महंगा रै

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