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-हरिनाम

रणजीत सिंह रणदेव चारण

रणजीत सिंह रणदेव चारण

कुण्डलिया

July 12, 2017

हरिराम जपले प्राणी ; जन्म यो सुधर जाय ।
केऊ मन हित सोच के ; बचे ना कर्म सिवाय ।।
बचे ना कर्म सिवाय ; जद न चले कर्म रामा ।
ऐसा नाम अमोल ; भजहुं मनवा बिन धामा ।।
आभा उर हरिें जोड ; नित वंदनाकारी हैं ।
केह रणदेव मनुज ; कर्मा प्रबल धारी हैं।।

रणजीत सिंह “रणदेव” चारण
मुण्डकोशियां
7300174627

Author
रणजीत सिंह रणदेव चारण
रणजीत सिंह " रणदेव" चारण गांव - मुण्डकोशियां, तहसिल - आमेट (राजसमंद) राज. - 7300174627 (व्हाटसप न.) मैं एक नव रचनाकार हूँ और अपनी भावोंकी लेखनी में प्रयासरत हूँ। लगभग इस पिडीया पर दी गई सभी विधाओं पर लिख सकता... Read more
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