हरतालिका मैं हरी हरी हो, हे नाथ तुम्हें में ध्याऊं

हे शिव शंकर उमा महेश्वर, निर्जला तुम्हें मनाऊं
हरतालिका में हरी हरी हो, नाथ तुम्हें में ध्याऊं
जैंसा गौरी ने पाया, मैं भी मनचाहा वर पाऊं
हरी भरी है सृष्टि सारी, मन भी हरा भरा है
ओढ़ी है हरी हरी ओढ़नी, सोलह शृंगार हरा है
हरा भरा मंडप डाला है, चूड़ी हरी हरी है
उमड़ रही है नदी प्रेम की, प्रेम अमृत से भरी भरी है
नाथ तुम्हें मैं क्या बताऊं, आप सब जानन हारे
मन की करो कामना पूरी, आप हो दुनिया के रखवारे
सारी रात में करूं जागरण, सखियों संग भजन करूंगी
सभी ओर सुख शांति रहे, प्रभु यही मैं यजन करूंगी

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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