" हम ज़िन्दगी , ठेल रहे हैं !!

पहले पेट
काम फिर दूजा !
शिक्षा दीक्षा
वक़्त अबूझा !
मात पिता ने –
राह थमा दी !
जैसे खेला –
खेल रहे हैं !!

शीत गरम
करे असर ना !
बारिश में
तरबतर रहे हाँ !
मौसम सारे –
कसर ना छोड़े !
कोल्हू के ज्यों –
बैल रहे हैं !!

उत्सव मेले
हैं लगे झमेले !
श्रम करते
रहते अलबेले !
कठिनाई से –
अर्जन होता !
जो हो मुश्किल –
झेल रहे हैं !!

कोरे भाषण
हम भी सुनते !
वोट दिये
फिर भी सिर धुनते !
बड़े लुभावन –
हैं होते वादे !
कुछ पाने में –
फेल रहे हैं !!

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 161

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share