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हम समझना नहीं चाहते,

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

November 13, 2017

*आंकड़ों पर आधारित है जिंदगी,
हिसाब जीवन का नाम नहीं,

गर जीवन-लीला है,
जिंदगी पटरी का नाम नहीं,

गर रीति-रिवाज है,परम्परा है जीवन,
आपसी कलह को जगह नहीं,

उलझाया गया है इस पहेली को,
अन्यथा कौन कहता है !
इसका उत्तर नहीं,

इस अस्तित्व में कोई मर्ज है,
जिसकी दवा नहीं,

Mahender Singh Author at

Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !
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