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हम सब आशावादी है ।

हम सब आशावादी हैं।
गिरगिर कर गिर समतल से,
उठकर चलने के आदी हैं ।
हम सब आशावादी है ।
चोट लगे कांटा लग जाए,
कितनी ठोकर खाएं ।
इरादे मेरे फौलादी हैं।
हम सब आशावादी हैं।
असफल होते तो भाग्य दिखाते।
छींक हुई हम झट रुक जाते।
सम्भलकर चलते मर्यादी हैं ।
हम सब आशावादी है ।
विन्ध्यप्रकाश मिश्र
9198989831 नरई संग्रामगढ प्रतापगढ

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Vindhya Prakash Mishra
Vindhya Prakash Mishra
नरई चौराहा संग्रामगढ प्रतापगढ उ प्र
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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र काव्य में रुचि होने के कारण मैं कविताएँ लिखता हूँ । मै...