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'हम'- विस्तृत दृष्टिकोण से

‘हम’ प्रथम दृष्टया हिंदी भाषा में प्रयोग किया जाने वाला एक शब्द है और ‘हम’ को कोई भी यदि ‘शब्द’ कह कर सम्बोधित करे तो वह कोई त्रुटि भी नहीं कर रहा है किंतु सूक्ष्म विश्लेषण के आधार पर मैं ‘हम’ के विषय में चर्चा करना चाहता हूँ। ऐसी चर्चा, जिसमें ‘हम’ एक शब्द मात्र न हो कर बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है और यह भूमिका यह शब्द हर किसी के जीवन में अदा करता है और तब तक अदा करता ही रहता है जब तक वह व्यक्ति जीवित है।
‘हम’ बहुवचन है ‘मैं’ शब्द का, जो कि ‘हमें’ व्याकरण की पोथियों (किसी भाषा विशेष के व्याकरण को सम्बोधित नहीं किया जा सकता) से ज्ञात होता आया है (अध्यापक महोदय ने भी बताया तो उसे ‘व्याकरण की पुस्तक से ज्ञात होता है’ वाले वाक्यांश के अंतर्गत माना गया है और साथ ही ऐसे कई माध्यम, जो हमें ‘हम’ के विषय में व्याकरण की दृष्टिकोण से बताते आ रहे हैं, उपरोक्त वाक्यांश में सम्मिलित हैं)।
‘हम’ सामान्यतः क्षेत्रीय बोलियों या कह लें भाषा के क्षेत्रीय रूपांतरण से प्रभावित होता ही रहता है, जिसमें यह सदैव ही होता है कि एकवचन और बहुवचन से कोई सम्बन्ध नहीं रहता।
एक व्यक्ति स्वयं को ‘हम’ से सम्बोधित करता है और स्पष्ट है कि कोई एक व्यक्ति बहुवचन नहीं हो सकता और ‘मैं’ का प्रयोग उस व्यक्ति विशेष की दृष्टिकोण में अहम प्रदर्शित करता है।
यदि बात करें उचित और अनुचित की, तो ‘हम’ का प्रयोग क्षेत्रीय बोलियों में जिस आशय से भी हो, उसमें त्रुटि नहीं निकली जा सकती।
त्रुटि निकली नहीं जा सकती का अर्थ यह नहीं है कि उसमें त्रुटि है नहीं बल्कि उसका अर्थ यह है कि त्रुटि निकलने की आवश्यकता नहीं आएगी और यह कह लें कि ध्यान नहीं जाएगा प्रयोज्यता पर क्योंकि ‘हम’ हमारे उत्तर प्रदेश में, विशेष रूप से पूर्वांचल में इस प्रकार से मुख से निकलता है कि लगता है कुछ नया सुना है, एक नए शब्द का पता चला है और मन में आता है कि इसके विषय में हम और पता करेंगे।
और भी बहुत पता करेंगे। पूर्वांचल के हृदय मिर्जापुर और वाराणसी जिले में ‘हम’ अर्थात ऐश्वर्य। यहाँ ऐश्वर्य कह दिया, तो एक संक्षेप स्पष्टीकरण देना उचित होगा कि ऐश्वर्य से आशय है वह भाव, जो अनुचित और कृत्रिम अहंकार को भूल कर आता है।
यहाँ शीर्षक को भावनाओं से हटा कर चर्चा करते हैं कि ‘हम’ बहुवचन है ‘मैं’ का और व्याकरण के अनुसार एक व्यक्ति स्वयं के लिए ‘मैं’ है और एक से अधिक (एकता से टूटे और बिखरे हुए भी कह सकते हैं लेकिन ‘हम’ भावनाओं से हटा कर यह चर्चा आगे बढ़ा रहे हैं, तो इससे अधिक अब नहीं बोलेंगे) व्यक्ति अर्थात ‘हम’, जिसका अनुसरण न होना भाषा में त्रुटि है और एक भाषा में व्याकरण के नियम से हटे, तो त्रुटि तो हुई मानी जानी ही है पर कभी-कभी, कहीं व्याकरण (अत्यंत दृढ़ता) को ध्यान से निकल कर ‘हम’ को याद कर के देखो, ‘हम’ को सोच कर देखो, ‘हम’ को समझ कर देखो और अनुभव करने का प्रयास करो, तो अवश्य ही अंतर दिखेगा और उसके पश्चात हम सब ‘हम’ को जियेंगे क्योंकि ‘मैं’ तो अटल सत्य बल्कि अंतिम सत्य है ही है।

जय हिंद
जय मेधा
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©® सन्दर्भ मिश्रा, वाराणसी

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सन्दर्भ मिश्र 'फ़क़ीर'
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