Skip to content

*** हम मौन रहे तो ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

July 21, 2017

हम मौन
रहे तो
ऐसे कई
डांगाबास
घटित होंगे
क्यों
भीतर ही भीतर
सहते हो
क्यों
अपने मन की
नहीं कहते
क्या
जोर जबरदस्ती
है तुम पर
क्या
औरों से
इतना डरते हो
है वक्त नही
अब डरने का
है जोश तो
कुछ करने का
क्यों
दलित -दलित
चिल्लाते हो
क्या
और नही है
तुमसे मुफ़लिस
क्या
रोते है वो
अपनी
हालत पर
संघर्ष नही
जब तक करते
यों बेमौत
रहेंगे हम मरते
फिर
औरों की ओर
है हम तकते
करेंगे सहाय
क्या
वो अपनी
जो अपनी रोटी
को तकते है
बिकते ईमान
धर्म यहां पर है
क्या जाति का दम
तुम भरते हो
हो अन्यायी
चाहे जो भी
उस पापी का
उद्धार करो
सम्भलो
जाति के दीवानों
अब तो कुछ
तुम सुधार करो
पीड़ित पीड़ित
होता है
उसका न जाति
धर्म कोई
जैसे
आततायी
हो कोई
मजहब उसका
न है कोई
फिर काहे
करते हो
बंटवारा
इस स्वच्छ सुंदर
समाज का तुम
ज़हर ना घोलो
दीवानो
इन्सां को इन्सां
रहने दो
मत दोहराओ
इन बातों को
फिर और घटित
न हो डांगाबास ।।
?मधुप बैरागी

Share this:
Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
Recommended for you