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हम भी एक दिन बड़े बनेंगे ….

संजय सिंह

संजय सिंह "सलिल"

कविता

February 12, 2017

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे ….

बड़े-बड़े घोटाले होंगे,
माना के मुंह काले होंगे ,
फिर भी सीना तान चलेंगे ,
खद्दर से मुंह साफ करेंगे ,
लेनदेन की बात करेंगे l

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे …

मानवता मर जाए तो क्या ?
कत्ल कोई हो जाए तो क्या ?
रह ना जाएं आंख में आंसू,
दिल पत्थर हो जाए तो क्या ?
एक लक्ष्य बस पैसा होगा ,
काला सफेद सब जमा करेंगे l

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे….

कुत्तों से जो गंदा होगा,
फर्श को नौकर साफ करेंगे,
सूपनखा घर की रानी होगी ,
सीता बर्तन साफ करेगी ,
अकड़े हुए हम घूमेंगे ,
और लोग हमें आदाब करेंगेl

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे ….

हिंदी से फिर नफरत होगी ,
अंग्रेजी में बात करेंगे ,
माना थोड़ी दिक्कत होगी,
यस और नो में काम करेंगे,
हिंदी दिवस पर हिंदी खातिर,
कुछ पैसे हम दान करेंगे l

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे….

पैसों का जब ढेर लगेगा ,
सर अपना फिर जाएगा ही ,
मानवता से फिर गांध आएगी ,
कुत्तों से हम प्यार करेंगे ,
जूते भी पहनाने को फिर,
यारो हम सर्वेंट रखेंगे l

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे….

सोम सुरा से यारी होगी ,
जी चाहिए अय्याशी होगी,
जिंदा के मुख हाथ रखेंगे,
फिर उसको जिंदा लाश करेंगे ,
ताबूतों का व्यापार करेंगे,
कफ़न की खातिर दान करेंगे l

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे…

जब बबलू डबलू डैड कहेंगे ,
उनकी मम्मा के हम हब्बी होंगे ,
फिर बाबूजी जी हम कैसे कहेंगे,
सुबह शाम क्यों चरण धरेंगे,
घर में रईसों का होगा आना-जाना,
ओल्ड केयर में उन्हें रखेंगे l

हम भी एक दिन बड़े बनेंगे ….

आधे कपड़ों में डाली होगी ,
ऐसे वैसे बर्दाश्त करेंगे ,
साथ में उसके ड्रिंक्स पिएंगे ,
अपने को एडजस्ट करेंगे ,
सुबह शाम को जोगिंग होगी ,
रात को क्लब में डांस करेंगे l

हम भी एक दिन पड़े बनेंगे …

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेशl

Author
संजय सिंह
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच... Read more
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