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हम बनाएँगे अपना घर

शिवदत्त श्रोत्रिय

शिवदत्त श्रोत्रिय

कविता

July 25, 2016

हम बनाएँगे अपना घर
होगा नया कोई रास्ता
होगी नयी कोई डगर
छोड़ अपनी राह तुम
चली आना सीधी इधर||

मार्ग को ना खोजना
ना सोचना गंतव्य किधर
मंज़िल वही बन जाएगी
साथ चलेंगे हम जिधर||

कुछ दूर मेरे साथ चलो
तब ही तो तुम जानोगी
हर ओर अजनबी होंगे
लेकिन ना होगा कोई डर ||

तुम अपनाकर मुझे
अपना जब बनाओगी सुनो
हम तुम वही रुक जाएँगे
होगा वही अपना शहर||

खुशियाँ, निष्ठा, समर्पण,त्याग, सम्मान की
ईट लगाएँगे जहाँ
प्रेम के गारे से जोड़
हम बनाएँगे अपना घर ||

© शिवदत्त श्रोत्रिय

Author
शिवदत्त श्रोत्रिय
हिन्दी साहित्य के प्रति रुझान, अपने विचारो की अभिव्यक्ति आप सब को समर्पित करता हूँ| ‎स्नातकोत्तर की उपाधि मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान से प्राप्त की और वर्तमान समय मे सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर मल्टी नॅशनल कंपनी मे कार्यरत... Read more
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