कविता · Reading time: 1 minute

हम बच्चे मस्त कलंदर

हम बच्चे मस्त कलंदर

एक मुट्ठी में सूरज का गोला
एक में लेकर चाँद सलोना
खेलने निकले हम अम्बर पे
करके सितारों का बिछोना !
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

बिना पंख के हवा में उड़ते
अड़यल तूफानों से लड़ते
बादलो के बिस्तर करके
आता है हमको सोना !
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

बिजलियों की चकाचौंध में
जश्न मनाये अपनी मौज में
बगल में छुपाकर पर्वतो को
मस्ती में खेले पाना-खोना !!
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

समुन्दर भरा अपनी आगोश
लहरो से प्रबल है अपना जोश
बारिश की बूंदो से मोती बना दे
रेत से बनाये अपना घरोंदा !!
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

दिन अपनी आँखों में रहता
रात का जुगनू रोता रहता
शबनम से दीपक जला कर
चमका दे धरती का कोना कोना
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

दरख्तों को भर भुजाओ में
घूम जाये दशो दिशाओ में
पुष्पलता को कंठ सजा के
गुनगुनाये साज सलोना !!
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

हम इस जग के पालनहार
हम ईश्वर का साश्वत रूप है
आने वाले कल ले मुट्ठी में
घूमते है हम जग का कोना कोना
हम बच्चे है मस्त कलंदर, काम है हँसना रोना !!

!

डी के निवातिया

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