Apr 17, 2021 · कविता
Reading time: 1 minute

हम नहीं लोग कहते हैं

खोए खोए से रहते हो
कभी कुछ नहीं कहते हो
लगता है तुम्हें इश्क हुआ है
जो सब चुपचाप सहते हो
ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।।

जब से मिली है मंजिल
तुम बहुत खुश रहते हो
बिलकुल भी मगरूर नहीं हो
जो देखते भी नहीं थे तुम्हें
उनकी भी बात सुनते हो
ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।।

हमेशा खुशी खुशी रहते हो
दुनिया को जन्नत कहते हो
जो मिल जाए मेहनत से
उसी में तुम संतुष्ट रहते हो
ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।।

दर्द को दिल में रखते हो
किसी से नहीं कहते हो
जान जाते है फिर भी सभी
अपनी आंखों से कहते हो
ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।।

मिलने जाते हो चुपके से उसे
नहीं पता किसी को मानते हो
दुनिया सबकुछ जानती है
तुम खुद को चालक मानते हो
ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।।

हो जैसे तुम दिखते नहीं हो
जो सोचते हो कहते नहीं हो
ये सब भी पता है सबको
सिर्फ तुम ये जानते नहीं हो
ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।।

हार नहीं मानते कभी भी
हर मुसीबत से लड़ते हो
जब तक जीत ना जाओ
बस संघर्ष करते रहते हो
ऐसा हम नहीं लोग कहते हैं।।

6 Likes · 2 Comments · 69 Views
#1 Trending Author
Surender Sharma
Surender Sharma
122 Posts · 9.1k Views
Follow 48 Followers
You may also like: