मुक्तक

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हम दिवाने हैं,अक्सर तन्हाई से बातें करते हैं।
सारी दुनिया से बेखबर ख्यालों में खोये रहते हैं।
अपने महबूब की याद में ही मर-मर कर जीते हैं –
इस दुनिया का सभी सितम हम तो हँस-हँस कर सहते हैं।
????? —लक्ष्मी सिंह?☺

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