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हम तो हौसला रख के आए थे जिंदगी गंवाने का।

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

गज़ल/गीतिका

November 9, 2016

ज्यादा जुनून नहीं था मुहब्बत में कुछ पाने का ,
हम तो हौसला रख के आए थे जिंदगी गंवाने का।

करोगे तो जानोगे कि इश्क़ बला क्या है,
इश्क़ कोई अल्फाज़ नहीं है समझाने का।

मैं जिसकी आँखों में नमी नहीं देख सकता,
उसी को मजा आ रहा है मुझे रुलाने का।

जिसे बचाने की खातिर हम इस दरिया में कूदे थे
उसे कभी ख़्याल नहीं आया हमें बचाने का।

तुम समझे हम कोई पागल है या जोकर है,
हम कोई मौका नहीं छोड़ते थे तुम्हें हंसाने का।

हम उस गिरे हुए शख़्स को भी उठाने पहुंचे,
जिनके दिमाग में ख़्याल था हमें गिराने का।

Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more
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