हम तो आग लगायेंगे...

देश के हर कोने को हम तो आग लगायेंगे,
हम नेता हैं पक्ष – विपक्ष के मत हथियाएँगे,

राजनीति हित आज हमें कुछ करना ही होगा,
घृणा द्वेष का ज़हर दिलों में भरना ही होगा,
जाति धरम और क्षेत्रवाद का ध्वज फहराएंगे, हम नेता हैं पक्ष-विपक्ष..

ढूंढ रहे हैं प्रतिपल जो जन रोटी दाल ठिकाना
सुना रही है भूख मौत का जिनको रोज़ तराना
उसी आमजन को कुरता हम फटा दिखाएँगे, हम नेता हैं पक्ष-विपक्ष

लगा चुनावी वर्ष घोषणा बरस पड़ेगी
बहुरूपियों संग चमचों की बारात सजेगी
दलित भोज पाखण्ड सहित चौपाल लगायेंगे. हम नेता हैं पक्ष-विपक्ष

सभ्यता तुम्हारी खतरे में बतलाना पड़ता है
हम ही ठेकेदार हैं केवल समझाना पड़ता है
युद्धोन्माद बढ़ा दुश्मन का भय दिखलायेंगे. हम नेता हैं पक्ष-विपक्ष

हम रक्तबीज हर दल में जाकर जिन्दा रहते हैं
दल-दल में हो देश मगर हम उम्दा रहते हैं
मनोवृत्तियों से सत्ता-सुख का जाल बिछायेंगे. हम नेता हैं पक्ष-विपक्ष

देश के हर कोने को हम तो आग लगायेंगे,
हम नेता हैं पक्ष – विपक्ष के मत हथियाएँगे,

प्रदीप तिवारी ‘धवल’

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