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” हम तुम रंग गए हैं , एक ही रंग में ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

March 12, 2017

अबीर है गुलाल है ,
बहकी हुई चाल है !
पीली भंगिया कहीं ,
सुरूर है , धमाल है !
तन मन भीगे हुए हैं –
किसी तरंग में !!

अमीर हैं गरीब हैं ,
दूर ना करीब हैं !
भेद कहीं आज नहीं ,
जगे सब नसीब हैं !
खुशियों का नर्तन है –
उत्सव संग में !!

धमाल है बवाल है ,
उठे कहीं सवाल हैं !
है मस्तियाँ चढ़ी कहीं ,
चुप्पियां बदहाल है !
पल्लवित है आशाएं –
नई उमंग में !!

शिकवा है मितवा है ,
नेता है फितवा है !
है कोई मलाल नहीं ,
सबका मन रितवा है !
रंग से परहेज नहीं –
ऐसे रंग में !!

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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