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हम जैसे शायद दिवाने नहीं है

gopal pathak

gopal pathak

गज़ल/गीतिका

April 15, 2017

खुला छोड़ा था जिनको दरवाजा अन्दर वो अभी तक आये नहीं है
हमने तो अपनी कहानी बता दी पर जज्वात उनने जताए नहीं है
वो नागिन के जैसी बलखाती चाले बाल अभी तक संभाले नहीं है
तुम्हारे तो पीछे जमाना है पागल पर हम जैसे दिवाने नहीं है
जान देने को तैयार है काफी पर सम्मा के काबिल परवाने नहीं है
पीने वालो की तो लम्बी कतारे लगी है पीने काबिल पैमाने नहीं है
कवि गोपाल पाठक ”कृष्णा”

Author
gopal pathak
मै साहित्य का अदना सा कलमकार हूँ माँ शारदे की कृपा से थोडा बहुत लिख लेता हूँ /मै ज्यादातर श्रंगार पर लिखता हूँ/और वीर लिखता हूँ/
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