कविता · Reading time: 1 minute

हम कतरा थे

क्या शिकायत करते हम उनसे
उनके जहां में हम तो कतरा थे

उनके रेशम जैसी दुनियां के लिए
हम दाग बन लग जाने के खतरा थे

देखा न पलट कर एक बार भी हमको
क्या हम आंखों में चुभते कोई कतरा थे
~ सिद्धार्थ

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