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*हमेशा*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

गज़ल/गीतिका

February 9, 2017

*हमेशा*
122 122 122 122
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
मुहब्बत सभी से करे जो हमेशा!
नज़र में खुदा की रहे वो हमेशा!!
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गमों की सताती जिसे है दुपहरी!
खुशी का खज़ाना उसे दो हमेशा !!
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डगर नेकियों की चले जो यहाँ पर !
धरा पे फरिश्ता बने वो हमेशा!!
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बुराई करे जो यहां पर सदा ही!
अगन में दुखों की जले वो हमेशा!!
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इनायत खुदा की हो जिस पे बरसती!
सफलता मिली है उसे तो हमेशा!!
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*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
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