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हमें जवाब चाहिए

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 9, 2017

आक्सीजन की कमी से दम तोड़ते मासूम
बाढ़ों के सैलाब में बहते बेबस नर नारी
ट्रेन हादसों में ढेर होती लाशें
शायद हैं सारे महज तमाशे
विद्यालयों में बालकों की निर्मम हत्याएँ
ढोंगियों द्वारा शोषित दुखित अबलाएं
किसी को नजर क्यों नहीं आ रहे हैं ?
क्या दोष था इन मासूमों का ?
क्यों सारे बड़बोले नेता चुप्पी लगा रहे हैं ?
सत्ता में जगह बनाने में
चुनाव में वोट कमाने में
हरदम जिनका दारोमदार है
जिसे जनता से न कोई सरोकार है।
जिन्हें चुना हमने
अपनी साज संभाल के लिए।
आज उन्हें फुर्सत तक नहीं
पूछने को लोगों के
जीने – मरने के हाल के लिए।
उनकी यह बेरुखी यह रवैया
हमको नहीं स्वीकार है।

—–रंजना माथुर दिनांक 09/09/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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