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हमारे गंदे कर्मोँ की समीक्षा अब नहीँ होती

सागर यादव 'जख्मी'

सागर यादव 'जख्मी'

मुक्तक

March 18, 2017

हमारे गंदे कर्मोँ की समीक्षा अब नहीँ होती

कि पहले की तरह मेरी परीक्षा अब नहीँ होती

तुम्हारे जिस्म की खुशबू हमेँ मदहोश करती है

मेरी बाहोँ मेँ आओ तुम प्रतीक्षा अब नहीँ होती

Author
सागर यादव 'जख्मी'
नाम- सागर यादव 'जख्मी' जन्म- 15 अगस्त जन्म स्थान- नरायनपुर पिता का नाम-राम आसरे माता का नाम - ब्रह्मदेवी कार्यक्षेत्र- अध्यापन माँ सरस्वती इंग्लिश एकाडमी ,सरौली,जौनपुर ,उत्तर प्रदेश. प्रकाशन -अमर उजाला ,दैनिक जागरण ,रचनाकार,हिन्दी साहित्य ,स्वर्गविभा,प्रकृतिमेल ,पब्लिक इमोशन बिजनौर ,साहित्यपीडिया... Read more
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