Sep 12, 2016 · मुक्तक
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हमारी हिंदी

नानक कबीर सूर तुलसी बिहारी मीरा
जायसी रहीम रसखान की ये भाषा है
राजकाज सकल समाज की ये वाणी और
भारत के ज्ञान-विज्ञान की ये भाषा है
क्यों न परभाषा की अधीनता को छोड़ें जब
राष्ट्र के आत्मसम्मान की ये भाषा है
नागरी के अक्षर क्षितिज पे उकेर चलें
विश्व देखे भारत महान की ये भाषा है

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Deepesh Dwivedi
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साहित्य,दर्शन एवं अध्यात्म मे विशेष रुचि। 34 वर्षो से राजभाषा कार्मिक। गृहपत्रिका एवं सामयीकियों मे... View full profile
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