हमारी हिंदी

तीन कुण्डलिया
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1
हिंदी अपने हिन्द के ,स्वाभिमान का हार
इसकी रक्षा को हमें, रहना है तैयार
रहना है तैयार , राष्ट्र की ये हो भाषा
करनी हमको पूर्ण, हमारी ये अभिलाषा
अगर अर्चना भाल, सजे ये जैसे बिंदी
तभी विश्व पर राज, करेगी अपनी हिंदी
2
हिंदी भाषा से करें , आओ हम सब प्यार
होगी तब संसार में , इसकी जय जयकार
इसकी जय जयकार , सिर्फ हिंदी ही बोलें
अपने मन के द्वार, मान में इसके खोलें
चलो अर्चना दीप , जलायें इस आशा से
हो अपनी पहचान ,यहाँ हिंदी भाषा से
3
अब हिंदी को चाहिए, अपने सब अधिकार
सहना इसको है नहीं, सौतेला व्यवहार
सौतेला व्यवहार , मिले जब अपने घर में
कैसे फिर सम्मान, मिलेगा दुनिया भर में
कसम अर्चना आज, उठायें आओ हम सब
देंगे दिल से प्यार ,सभी जन हिंदी को अब
डॉ अर्चना

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