हमारी-तुम्हारी निभेगी यहाँ भी

फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन
वज़्न-122-122-122-122
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खिला आज तो चेहरा यार का है।
लगे ये नशा तो हमें प्यार का है।।

चमन-फूल हँसते हुए आज देखो।
असर ये बहारे-समाचार का है।।

क़दम पंख-से हो गए हैं तुम्हारे।
यहाँ मामला तो नयन-पार का है।।

हमारी तुम्हारी निभेगी यहाँ भी।
सुना है मिलन नाव-पतवार का है।।

अकेले-अकेले रहें तो मज़ा क्या?
मज़ा तो यहाँ साथ एतबार का है।।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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सर्वाधिकार सुरक्षित–radheys581@gmail.com

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