कविता · Reading time: 1 minute

हमारा भारत

तुंग शिखर पर दिव्य-आलोकित, भारत -भाल चमकता है
जलधि जिसके चरण पखारे, विश्व-गुरू प्रणेता है
जहां आंखों में ममता बसती है बांहो में कुटुंब समाता है
संगीत जहां है रोम-रोम में भगवान भी बांसुरीवाला है
जहां जन्नत मां की चरणों में जहां पिता वृक्ष की छाया है
त्योहार जहां है रंगो से जहां दीपों से तमस् भी हारा है
जहां राम की पूजा होती है और अली भी दिल में होते हैं
जहां गाथा है रणवीरों की, महाराणा और बलवीरों की
जहां सुबह स्वर्णिम होती है और शाम सिंदुरी आभा है
जहां हवा बसंती होती है जहां पंछी गाना गाते हैं
माटी की सोंधी खुशबू है जहां गाँवो के गीत सुहाते हैं
जहां शिव ही सुंदर होते हैं जहां शिवा ही शक्ति होती है
जहां माता की भक्ति से भी पहले देश की भक्ति होती है
जहां विषधर भी गलहार बना है, जटा में गंगा थामा है
जहां चंद्र विराजे शिखर पर जिसके ऐसा भारत हमारा है।

##ऋतुराज

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