.
Skip to content

हमें धोखा हुआ तितली के पर का……..

SUDESH KUMAR MEHAR

SUDESH KUMAR MEHAR

गज़ल/गीतिका

July 14, 2016

लड़कपन की हसीं दिलकश डगर का।
हमारा प्यार था पहली नज़र का ।।

सबब वो शाम का वो ही सहर का।
भरोसा क्या करें ऐसी नज़र का।।

सिवा मेरे दिखे हैं ऐब सबके।
बड़ा धोखा रहा मेरी नज़र का।।

तुम्हारी खुशबुएँ रख दीं हवा पर
पता लिख्खा नहीं तेरे शहर का।

फड़कती थीं उनीदीं सी वो पलकें,
हमें धोखा हुआ तितली के पर का।।

…..सुदेश कुमार मेहर

Author
SUDESH KUMAR MEHAR
ग़ज़ल, गीत, नज़्म, दोहे, कविता, कहानी, लेख,गीतिका लेखन. प्रकाशन‌‌--१. भूल ज़ाना तुझे आसान तो नही २--- सुनिक्षा [ग़ज़ल संग्रह ] 3---use keh to doo'n(Ghazal Sangrah)
Recommended Posts
!! कदम कदम पर धोखा !!
यह सच है, यहाँ, क्या हर जगह कदम कदम पर धोखा मिलता है लूटने को जमाना साथ देता है और लूट कर अपनी राह हो... Read more
देकर दुआएँ  आज फिर हम पर सितम वो  कर गए
हम आज तक खामोश हैं और वो भी कुछ कहते नहीं दर्द के नग्मों में हक़ बस मेरा नजर आता है देकर दुआएँ आज फिर... Read more
इक नजर
*गीतिका* मापनी-122 122 122 12 हमें आपकी इक नजर चाहिये। कयामत भरी बा-असर चाहिये। बना आशियां हम जहां पर रहें। हमें प्रेम का वो शजर... Read more
भाई
उसकी आंखों में हमें अपना ही अक्श नजर आता है । जब कोई ना हो साथ देने वाला तब वो शख्स नजर आता है ।... Read more