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हमें धोखा हुआ तितली के पर का........

लड़कपन की हसीं दिलकश डगर का।
हमारा प्यार था पहली नज़र का ।।

सबब वो शाम का वो ही सहर का।
भरोसा क्या करें ऐसी नज़र का।।

सिवा मेरे दिखे हैं ऐब सबके।
बड़ा धोखा रहा मेरी नज़र का।।

तुम्हारी खुशबुएँ रख दीं हवा पर
पता लिख्खा नहीं तेरे शहर का।

फड़कती थीं उनीदीं सी वो पलकें,
हमें धोखा हुआ तितली के पर का।।

…..सुदेश कुमार मेहर

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SUDESH KUMAR MEHAR
SUDESH KUMAR MEHAR
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ग़ज़ल, गीत, नज़्म, दोहे, कविता, कहानी, लेख,गीतिका लेखन. प्रकाशन‌‌--१. भूल ज़ाना तुझे आसान तो नही...
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