हमारा देश प्यारा है।

विधाता छंद
मापिनी-1222 1222 ,1222 1222
हमारी जान से ज़्यादा, हमारा देश प्यारा है।
हमें है गर्व भारत पर, नयन का वो सितारा है।

पखारे पाँव नित सागर, मुकुट जिसका हिमाला है।
जहाँ बहती नदी गंगा, सुनहरी श्वेत माला है।
गगन में शोभते तारे, धरा पर दीप माला है।
यहाँ का वीर हर बच्चा, निडर हर एक बाला है।
जहाँ पर शंख मंदिर में, बजाता नित सवेरा है।
हमारी जान से ज़्यादा, हमारा देश प्यारा है।

जहाँ पर सिंह से बच्चा, खिलौने की तरह खेला।
मिला गुरु ज्ञान का गौरव, जगत भी हो गया चेला।
यहाँ हर धर्म का लगता, कई त्योहार औ मेला।
रहे सब साथ में मिलकर, सभी कुछ साथ में झेला।
उपजते खेत में सोना,भरा खलिहान सारा है।
हमारी जान से ज़्यादा,हमारा देश प्यारा है।

यहीं संगम त्रिवेणी है, कला सुन्दर रसीली है।
बड़ा ये देश गर्वीला, रसम, ऋतुएँ रँगीली है।
धरा का रूप दुल्हन सा, हवा मादक नशीली है।
बजे नित श्याम की बंशी, मधुर वाणी सुरीली है।
जहाँ हर डाल सोने की, विहग करती बसेरा है।
हमारी जान से ज़्यादा, हमारा देश प्यारा है।

जहाँ पर राग रंगों की,हँसी महफ़िल निराली है।
जलाते प्यार के दीपक, कभी नफ़रत न पाली है।
कहीं रमजान की थाली, कहीं होली, दिवाली है।
जहाँ सुख स्वर्ग-सा लगता, खिली हर शाम लाली है।

हमारी मात ने हमको, सदा से ही दुलारा है।
हमारी जान से ज़्यादा, हमारा देश प्यारा है।
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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