हमारा आज ही देखो हमारा कल सजाता है

हमारा आज ही देखो हमारा कल सजाता है
न वापस लौट कर बीता हुआ यह वक़्त आता है

मिलाता छीनता हमसे हमारे वक़्त अपने हैं
कभी इसने किये पूरे कभी तोड़े भी सपने हैं
सभी गुजरे पलों को कल के सीने में छिपाता है
हमारा आज ही देखो हमारा कल सजाता है

न बीते कल की तुम सोचो न आने वाले कल की ही
ख़ुशी तो तुम मना लो बस यहाँ प्रत्येक पल की ही
जियो बस आज में ही ये बदल फिर कल में जाता है
हमारा आज ही देखो हमारा कल सजाता है

रहे कल में अगर डूबे न होगा आज हाथो में
बिताओ वक़्त को अपने नहीं बेकार बातों में
समय हमको जिताता गर यही हमको हराता है
हमारा आज ही देखो हमारा कल सजाता है

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद(उ प्र)

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