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हमसफ़र

Manju Bansal

Manju Bansal

कविता

September 16, 2017

जीवन की राहें अधूरी हैं हमसफ़र बिना
जीवन बिल्कुल सूना है हमसफ़र बिना
हमसफ़र हो ऐसा जो हमराज़ बन जाये
इस भरी दुनिया में सहारा बन जाये ।।

संघर्ष के दौर में क़दम मिलाकर चले
धूप गर पड़े तो ठंडी छाँव वो करे
बारिश की रिमझिम में प्यार के दो शब्द कहे
हमसफ़र हो ऐसा जो ज़िंदगी सँवार दे ।।

सुख- दु:ख जो हँसते- हँसते संग में सहे
अंधेरे दूर कर रोशनी की किरण बन जाये
हमसफ़र वो जिससे जीवन खूबसूरत बन जाये
जीवन का हर एक लम्हा यादगार बन जाये ।।

लंबा सफ़र ज़िंदगी का यूँ ही कटता नहीं
तन्हा हो तो ये दिल कहीं लगता नहीं
हमसफ़र जो जीवन में हर रंग बिखेर दे
विश्वास की डोर जो कभी टूटने न दे ।।

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Author
Manju Bansal

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