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हमवतन साथियो

हमवतन साथियो, प्यारे देश-वासियो…
ये नगाङे विजय के बजालो सभी…..
तिरंगा ऊंचा जो करके चले…. 2
अश्कधारा उन पे बहालो कभी…..

हमवतन साथियो, प्यारे देश-वासियो…

सरहद की गोद में समाए जो हैं…..
सिर्फ संदेसे ही घर वापस आए जो हैं…..
जो हिमातय की शिलाओं पे बेसदा रह गए,
तिरंगे में लिपट कर जो अलविदा कह गए…..
अश्कधारा उन पे बहालो कभी…..

हमवतन साथियो …….

मांग दुल्हन की जो मिटा कर चले….
कोख ममता की जो लुटा कर चले…
राखी वाली कलाई छुपा कर चले,
वीर बाँकुरे जो जवानी लुटाकर चले…..
अश्कधारा उन पे बहालो कभी…..

हम वतन साथियो ……

लहरा कर तिरंगा जो दुशमन पर चढे….
सीना छलनी हुआ धरा पर सरपट गिरे…
हौशला ना टुटा निडर वो फिर भी लङे,
मिटा कर खुद को जो अमर हो गए ….
अश्कधारा उन पे बहालो कभी…..

हम वतन साथियो, प्यारे देश-वासियो…
जयहिंद जयकारा लगालो सभी…..
तिरंगा ऊंचा जो करके चले…. 2
अश्कधारा उन पे बहालो कभी…..

हम वतन साथियो……..

– अंबर

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