हमने चाहा जिनको

हमने चाहा जिनको , वो इश्क का कद्रदान न मिला
इन्तजार किया ताउम्र जिनका, वो इश्क का तलबगार न मिला
हमने उन्हें अपना कहा, उन्होंने मुझे अपना
दो दिल मिले , जिन्दगी गुलज़ार हो गयी

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मैं अनिल कुमार गुप्ता , शिक्षक के पद पर कार्यरत हूँ मुझे कवितायें लिखने ,...
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