गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

*हमने कोशिश की*

*हमने कोशीश की*

सच कहने की जब भी हमने कोशिश की,,
तब ही हमको चुप करने की कोशिश की,,

बातों को,जज्बातों कभी न उनने समझा,,
बस इल्जामो से ढकने की कोशिश की,,

मेरी खूबी को खूंटी से टांग दिया और,,
अपनी डफली को बजने की कोशिश की,,

सुनसानी की तंग गाली मैं छोड़ा मुझको,,
ताज गली मैं राज करने की कोशिश की,,

उनकी गफलत को हर चादर से ढकते वो,,
भरे बाजार हमे पकरने की कोशिश की,,

तनमन और ये सारा जीवन बोझ बनाया,,
जीते जी भी तो हमने मरने की कोशिश की,,

शुद्ध कला और प्रेम के पूजक है हम तो भाई,,
पाखंडों के कई रंगों से रंगने की कोशिश की,,

चार दिवारी मैं ही कैद किया सब उनने देखो,,
ऊपर से सदा हमको ही हरने की कोशिश की,,

मेरे सारे खेल खिलौने छीने मुझसे दिल तोड़ा,,
बचपन से अबतक ही छलने की कोशिश की,,

मनु बताये क्या क्या बदलने की कोशिश की,,
कली फूल पराग ख़ुश्बू सबको मलने की कोशिश की,,

मानक लाल मनु,,,,,

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