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हमने कुछ ऐसे इरादे बदले

सिद्दत से चाहा हमने मगर इरादे ना बदले
जमाने बदल गये, मगर हमने यार ना बदले,

और हा, गुमां था ने तुमको अपने सहर पर
हमने देखा है, तुम्हारे सहर भी बदले,

तुम कहते थे ना,बहुत सुकून मिलता है तेरे घर से गुजर कर
हमने देखा है तुमने तो वो रास्ते भी बदले,

क्या करते तेरे सहर मैं रुक कर, कोई था ही नही तेरे सिवा हमारा
फिर हमने भी कुछ इस तरहा से अपने इरादे बदले,

हा कहा था हमने, जब चाहो आ जाना हमारे पास
हमने अभी भी तुमसे किये हुये, वादे नहीं बदले !!

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RAJU QURESHI
RAJU QURESHI
Nuh ( HR )
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दिल के जज्बातों को बस लिखकर बयाँ कर देता हूँ ; बचपन से ही मुझे...
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