कविता · Reading time: 1 minute

हमने कभी कलम न बेंची….

हमने कभी कलम न बेची हर दिन इक इतिहास लिखा!
हो बेखौफ सदा ही हमने औरों से कुछ खास लिखा!!

कमजोरों का दर्द और चेहरा गमगीन उदास लिखा!
लिखा भूख को भूख हमेशा और प्यास को प्यास लिखा!!

सन्नाटा भी सन्न रह गया जब मरघट का वास लिखा!
होकर निडर हमेशा हमने सत्ता का अट्हास लिखा!!

चौथेपन की घुटन लिखी वो तरूणायी का रास लिखा!
हर मन की पीड़ा को गाया हर दिल का एहसास लिखा!!

हमने कभी कलम न बेची हर दिन इक इतिहास लिखा!
हमने कभी कलम न बेची हर दिन इक इतिहास लिखा!!
@विपिन शर्मा

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