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हमको बाँध न पाये

बुद्ध तथागत अपना मन,तन, फक्कड़ मस्त कबीर।
हमको बाँध न पाये कोई, दुनिया की जंजीर।।

तेरा-मेरा, इसका-उसका, अपना और पराया।
सबकुछ कोरा झूठ सत्य यह, लोभ मोह की माया।
हीरे मोती कंकड़ पत्थर, धन मरघट की मिट्टी।
अपने लिए जिंदगी मतलब, कोनकटी इक चिट्ठी।।

अपनी अँखियाँ मीराबाई, अश्रु जाह्नवी नीर।
हमको बाँध न पाये कोई, दुनिया की जंजीर।

अपना टूटा फूटा छप्पर, हमको मथुरा काशी।
धर्म हमारा गृहस्थ किंतु हैं, कर्म शुद्ध सन्यासी।
भाव हमारे कृष्ण कन्हैया, भक्ति राधिका रानी।
कमजोरी, निर्धन की पीड़ा, शक्ति चित्त बलिदानी।

स्रोत प्रेरणा के राणा आदर्श शिवाजी वीर।
हमको बाँध न पाये कोई, दुनिया की जंजीर।

देशद्रोहियों के सीने पर, खुलकर वार करेंगे।
सिंहासन की तानाशाही का प्रतिकार करेंगे।
पीड़ित के परछाई बनकर, हरदम साथ चलेंगे।
गीत हमारे घोर तिमिर में, बनकर “दीप” जलेंगे।

कलम हमारी मनु मरदानी, शब्द पार्थ के तीर।
हमको बाँध न पाये कोई, दुनिया की जंजीर।।

प्रदीप कुमार “दीप”
सुजातपुर, सम्भल (उ०प्र०)

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