Jun 8, 2017 · कविता
Reading time: 1 minute

हक

हक के दमन का तो इतिहास रहा है,
कोई जयचन्द तो कोई भक्त रहा है,
याद है मुझे वह पोरश का भी पौरुष,
सूली पर चढ़ कर भी जो शत्रु को ललकार रहा है ।।

29 Views
Copy link to share
MridulC Srivastava
41 Posts · 1.8k Views
Follow 1 Follower
हीरे सजा रखे हैं तिलक सा माथे उन्हें माटी का कोई मोल नहीं, माटी ही... View full profile
You may also like: