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हंसी

Neelam Sharma

Neelam Sharma

हाइकु

July 22, 2017

हाइकु

मन सिसका
देख नीड़ पराया
हंसना भूली।

फेन झाग सी
ये ज़िन्दगी सबकी
हंसते रहो।

नहीं दांत हैं
न आंत शरीर में
ज़ीस्त हंसती।

महा नगर
प्रदूषित जीवन
हंसे बिमारी।

बहनें रोती
नित अस्मत लूटे
हंसे शैतान।

क्षण भंगुर
ज़िंदगी है नीलम
तू भी हंसले।

नीलम शर्मा

Author
Neelam Sharma
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