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” हंसी हमारा गहना है ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

June 17, 2017

परिधान सजे रंगीले ,
आभूषण भी बड़े कटीले !
फूलोँ से है प्यार बड़ा ,
ऐसे लदे , लगे सजीले !
उन्मुक्त धरा ,उन्मुक्त गगन –
उन्मुक्त हमे रहना है !!

भाव भंगिमा सुमधुर ,
नयन नशीले बड़े मदिर !
आतप सहती है काया ,
नहीं थकें हम पल भर !
राह कंटीली है पथरीली –
खुशबू जैसा बहना है !!

प्रकृति की कलकल ,
जीवन है यहां निश्छल !
ज्यादह की ना चाहत ,
हम पीते रोज़ हलाहल ।
प्यार यहाँ कसौटी चढ़ता –
कांटों संग रहना है ।।

रंग कई बिखरे हैं ,
यहाँ स्वप्न सजे संवरें हैं !
है पराग बिखरा सा ,
औ खुशबू पर पहरे हैं !
तीर कमान खिचें कब जाने –
भाग्य बदा सहना है !!

बृज व्यास

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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