मुक्तक · Reading time: 1 minute

हँस लीजिये

हँस लीजिये
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छोड़िये एक भी आप दावत नहीं
खाइये ठूसकर है शिकायत नहीं
सिर्फ हँस लीजिये पागलों की तरह
हाजमोले की कोई ज़रूरत नहीं

– आकाश महेशपुरी

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